हमारे बारे में





abc

प्रस्तावना

परिवार से प्राप्त सेवा-भावना की विरासत के चलते मात्र 10 वर्ष की आयु में ही सामाजिक जीवन में कदम रखा। पढ़ाई के साथ-साथ लेखन में विशेष रुचि होने के कारण पत्रकारिता से सामाजिक कार्यों की शुरुआत हुई। केवल 14 वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के पत्रकार बनने का सम्मान प्राप्त किया। तत्पश्चात *“केसरिया शक्ति”* नामक समाचार पत्र का प्रकाशन भी प्रारंभ किया।

पत्रकारिता के साथ-साथ भारत पत्रकार संघ, महानगर पत्रकार संघ, विभिन्न न्यूज़ चैनल और सामाजिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाई। भारतीय कलाओं के प्रति गहरी लगन तथा पारंपरिक कला, कुश्ती, अखाड़ा और व्यायाम के प्रति समर्पण के चलते कई प्रतियोगिताएँ जीतकर पदक अर्जित किए और नगर का गौरव बढ़ाया।

समय के साथ भारतीय संस्कृति, कला, समाज सेवा, धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सक्रियता और अधिक बढ़ती गई। जीवन अनुभवों ने समाज सेवा को ही जीवन का ध्येय बनाने की प्रेरणा दी। गुरुजनों और बुजुर्गों से प्राप्त शिक्षा तथा ईश्वर की कृपा से सीखी कलाओं को समाज को समर्पित करने का संकल्प लिया।

विशेष रूप से बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा, गौ-सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, भोजन सेवा, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय कलाओं के संवर्धन जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया। सेवा और लोक-कल्याण की इसी भावना को स्थायी रूप देने हेतु अपने परंपरागत अखाड़े को पंजीकृत कराया, जिसे बाद में **“धनवदी हज़ शाही अखाड़ा फाउंडेशन”** नाम दिया गया।

कुछ ही सदस्यों से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज लगभग 25,000 सदस्यों का परिवार बन चुका है और मध्यप्रदेश से आगे बढ़ते हुए अब देश के चार और राज्यों में अपनी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

स्थापना एवं परिचय

धनुवेदी हिन्दू शाही अखाड़ा फाउंडेशन की स्थापना अखाड़ा परंपरा के अनुसार गुड़ी पड़वा के पावन पर्व पर प्रथम परम पूज्य अखाड़ा श्री प्रमुख के द्वारा 1950 में हुई थी। उस समय अखाड़ा का नाम श्री केसरी नंदन व्यायामशाला था।

पीथमपुर में आयोजित तंत महोत्सव में जिसमें पूरे देश के कई प्रसिद्ध साधु-संत एवं साहित्यकार भी पधारे थे, उनके द्वारा संस्था को विशेष आशीर्वाद मिला। तत्पश्चात अखाड़े की लोकप्रियता एवं समाजसेवा को देखते हुए संस्था का नाम धनुवेदी हिन्दू शाही अखाड़ा रखा गया और इसी नाम से संस्था को पंजीकृत किया गया।

धनुवेदी हिन्दू शाही अखाड़ा फाउंडेशन एक पंजीकृत संस्था है जिसे आवश्यक समस्त अनुमोदन एवं प्रमाण पत्र प्राप्त हैं। वर्तमान समय में संस्था शासन के कई विभागों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से कार्य कर रही है, जिनमें प्रमुख रूप से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग सम्मिलित हैं। इसके साथ संस्था का संबंध शासन के अन्य विभाग जन अभियान परिषद एवं नगर विकास प्रमुख समिति से भी है।

संस्था समाज कल्याण एवं सेवाभाव से कई क्षेत्रों जैसे – शिक्षा, चिकित्सा, योग, ध्यान, अध्यापन, सेवा, निशुल्क प्रशिक्षण, बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षा, लोकहित कार्य, गौ सेवा, पर्यावरण, प्रतिवर्ष पौधारोपण एवं जनजागरूकता अभियान, आदि को निरंतर निस्वार्थ भाव से कर रही है।

संस्था द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मरक्षा की भारतीय पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण निरंतर प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण में विशेष रूप से निःशुल्क कराटे, जूडो, लाठी, योग, व्यायाम, कुश्ती एवं प्राचीन आत्मरक्षा पद्धतियों का समावेश है। इसके अतिरिक्त संस्था बच्चों, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को भी स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण दे रही है।

आज धनुवेदी हिन्दू शाही अखाड़ा फाउंडेशन भारतीय पारंपरिक आत्मरक्षा कला प्रशिक्षण के लिए पूरे देश में अपनी पहचान रखता है और इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मध्यप्रदेश के अलावा भी संस्था देश के कई प्रदेशों में भारतीय पारंपरिक आत्मरक्षा कलाओं के प्रशिक्षण से समाज एवं बहनों-भाइयों को लाभ पहुँचा रही है। अब तक संस्था देश में हज़ारों की संख्या में भाइयों और बहनों को प्रशिक्षित कर चुकी है।

इन प्रशिक्षणों से कई भाइयों एवं बहनों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है और इन पारंपरिक कलाओं को खेल विभाग की सूची में शामिल किए जाने के कारण कई भाई-बहन राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर शासकीय सेवाओं का अवसर प्राप्त कर रहे हैं और इसके साथ देश का नाम भी बढ़ा रहे हैं।





abc